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रविवार, 27 अक्तूबर 2013

सूरज प्रकाश की कहानी 'दो जीवन समांतर' (स्‍वर यूनुस ख़ान और ममता सिंह का)

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'कथा-पाठ' के ब्‍लॉग 'कॉफी-हाउस' में अब तक हमने कई कहानियों का वाचन किया। लेकिन उनमें स्‍वर एक ही होता था। यानी या तो पुरूष स्‍वर यूनुस ख़ान का या महिला स्‍वर ममता सिंह का। पर जब कथाकार मित्र सूरज प्रकाश जी से चर्चा हुई तो उन्‍होंने अपनी एक ऐसी कहानी दी... जिसमें एक ही स्‍वर से काम चलने वाला नहीं था। इसलिए इस बार 'कथा-पाठ' में एक दिलचस्‍प प्रयोग है। इस बार कहानी का वाचन हम दोनों ने मिलकर किया है।
दरअसल कहानी की मांग की ये थी। प्रयोग कैसा है इसका फ़ैसला आप करेंगे। सूरज जी की कहानियों के हम पहले से ही प्रशंसक रहे हैं। उनकी लगभग सभी रचनाएं आप उनके ब्‍लॉग 'कथाकार' पर पढ़ सकते हैं।
आज जो कहानी प्रस्‍तुत है, उसका शीर्षक है 'दो जीवन समांतर'। इसे सुनने के लिए आपको अपने व्‍यस्‍त जीवन से तकरीबन उन्‍नीस मिनिट निकालने होंगे। कहानी डाउनलोड करके आपस में बांटी या साझा भी की जा सकती है।

Story: Do Jeevan Samaantar
Writer: Suraj Prakash
Voice: Mamta Singh And Yunus Khan
Duration: 18 30




एक और प्‍लेयर ताकि सनद रहे

ये रही डाउनलोड कडियां
डाउनलोड कड़ी एक 

डाउनलोड कड़ी दो 

ये भी कह दें कि 'कॉफी-हाउस' की कहानियों को आप डाउनलोड करके अपने मित्रों-आत्‍मीयों के साथ बांट सकते हैं। साझा कर सकते हैं। कोई समस्‍या है तो ये ट्यूटोरियल पढ़ें

अब तक की कहानियों की सूची- 

महादेवी वर्मा की रचना--'गिल्‍लू'
भीष्‍म साहनी की कहानी--'चीफ़ की दावत'
मन्‍नू भंडारी की कहानी-'सयानी बुआ'
एंतोन चेखव की कहानी- 'एक छोटा-सा मज़ाक़'
सियाराम शरण गुप्‍त की कहानी-- 'काकी'
हरिशंकर परसाई की रचना--'चिरऊ महाराज'
सुधा अरोड़ा की कहानी--'एक औरत तीन बटा चार'
सत्‍यजीत रे की कहानी--'सहपाठी'
जयशंकर प्रसाद की कहानी--'ममता'
दो बाल कहानियां--बड़े भैया के स्‍वर में
उषा प्रियंवदा की कहानी वापसी
अमरकांत की कहानी 'दोपहर का भोजन'
ओ. हेनरी की कहानी 'आखिरी पत्‍ता'
लू शुन की कहानी आखिरी बातचीत'
प्रत्‍यक्षा की कहानी 'बलमवा तुम क्‍या जानो प्रीत'
अज्ञेय की कहानी 'गैंगरीन'
महादेवी वर्मा का संस्‍मरण 'सोना हिरणा'
ओमा शर्मा की कहानी ग्‍लोबलाइज़ेशन
ममता कालिया की कहानी 
लैला मजनूं
प्रेमचंद की कहानी 'बड़े भाई साहब'

तो अब अगले रविवार मिलेंगे, किसी और रोचक कहानी के पाठ के साथ। आप डाउनलोड करके कहानियों को साझा कर रहे हैं ना। एक छोटा-सा काम और कीजिएगा। 'कॉफी-हाउस' के बारे में अपने साथियों को अवश्‍य बताईयेगा। 

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'कथा-पाठ' के ब्‍लॉग 'कॉफी-हाउस' में अब तक हमने कई कहानियों का वाचन किया। लेकिन उनमें स्‍वर एक ही होता था। यानी या तो पुरूष स्‍वर यूनुस ख़ान का या महिला स्‍वर ममता सिंह का। पर जब कथाकार मित्र सूरज प्रकाश जी से चर्चा हुई तो उन्‍होंने अपनी एक ऐसी कहानी दी... जिसमें एक ही स्‍वर से काम चलने वाला नहीं था। इसलिए इस बार 'कथा-पाठ' में एक दिलचस्‍प प्रयोग है। इस बार कहानी का वाचन हम दोनों ने मिलकर किया है।
दरअसल कहानी की मांग की ये थी। प्रयोग कैसा है इसका फ़ैसला आप करेंगे। सूरज जी की कहानियों के हम पहले से ही प्रशंसक रहे हैं। उनकी लगभग सभी रचनाएं आप उनके ब्‍लॉग 'कथाकार' पर पढ़ सकते हैं।
आज जो कहानी प्रस्‍तुत है, उसका शीर्षक है 'दो जीवन समांतर'। इसे सुनने के लिए आपको अपने व्‍यस्‍त जीवन से तकरीबन उन्‍नीस मिनिट निकालने होंगे। कहानी डाउनलोड करके आपस में बांटी या साझा भी की जा सकती है।

Story: Do Jeevan Samaantar
Writer: Suraj Prakash
Voice: Mamta Singh And Yunus Khan
Duration: 18 30




एक और प्‍लेयर ताकि सनद रहे

ये रही डाउनलोड कडियां
डाउनलोड कड़ी एक 

डाउनलोड कड़ी दो 

ये भी कह दें कि 'कॉफी-हाउस' की कहानियों को आप डाउनलोड करके अपने मित्रों-आत्‍मीयों के साथ बांट सकते हैं। साझा कर सकते हैं। कोई समस्‍या है तो ये ट्यूटोरियल पढ़ें

अब तक की कहानियों की सूची- 

महादेवी वर्मा की रचना--'गिल्‍लू'
भीष्‍म साहनी की कहानी--'चीफ़ की दावत'
मन्‍नू भंडारी की कहानी-'सयानी बुआ'
एंतोन चेखव की कहानी- 'एक छोटा-सा मज़ाक़'
सियाराम शरण गुप्‍त की कहानी-- 'काकी'
हरिशंकर परसाई की रचना--'चिरऊ महाराज'
सुधा अरोड़ा की कहानी--'एक औरत तीन बटा चार'
सत्‍यजीत रे की कहानी--'सहपाठी'
जयशंकर प्रसाद की कहानी--'ममता'
दो बाल कहानियां--बड़े भैया के स्‍वर में
उषा प्रियंवदा की कहानी वापसी
अमरकांत की कहानी 'दोपहर का भोजन'
ओ. हेनरी की कहानी 'आखिरी पत्‍ता'
लू शुन की कहानी आखिरी बातचीत'
प्रत्‍यक्षा की कहानी 'बलमवा तुम क्‍या जानो प्रीत'
अज्ञेय की कहानी 'गैंगरीन'
महादेवी वर्मा का संस्‍मरण 'सोना हिरणा'
ओमा शर्मा की कहानी ग्‍लोबलाइज़ेशन
ममता कालिया की कहानी 
लैला मजनूं
प्रेमचंद की कहानी 'बड़े भाई साहब'

तो अब अगले रविवार मिलेंगे, किसी और रोचक कहानी के पाठ के साथ। आप डाउनलोड करके कहानियों को साझा कर रहे हैं ना। एक छोटा-सा काम और कीजिएगा। 'कॉफी-हाउस' के बारे में अपने साथियों को अवश्‍य बताईयेगा। 

12 टिप्पणियाँ:

  1. बेहतरीन ब्लॉग .... रेडियो की कमी को पूरा कर रहा है

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  2. सुबह-सुबह रेडियो सखी और जादू के पापा की आवाज मे चाय पीते हुये यह कहानी सुनने से बेहतर भी कुछ हो सकता है भला?

    कहानी के नायक और नायिका अगर ममता-युनुस से मिले होते तो शायद उनकी कहानी कुछ और होती। वे भी इसी तरह की जुगलबंदी कर रहे होते कहीं।

    बहुत अच्छा प्रयोग। शानदार। जानदार। जुगुल जोड़ी सलामत रहे और ऐसे ही बेहतरीन काम करती रहे।

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  3. अनूठा और गज़ब का प्रयोग उर्फ़ एक्सपेरिमेंट !....

    .....एकदम किसी साइन्टिस्ट जैसा !!

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  4. रेडियो नहीं सुनने वालो तक रेडियों को पहुँचाने की एक बेहतर तरकीब है। कहानी सुनने मे बड़ा आनंद आया।

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  5. सच में, समय का पता ही नहीं चला, स्मृतियों के गलियारों में।

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  6. भाई यूनुस और ममता, अभी जयपुर से मोनालिसा सैनी ने बताया कि उसने पत्रकारिता की अपनी कक्षा में मेरी कहानी दो जीवन समांतर सुनायी। बच्‍चे अभिभूत थे कि कहानी ऐसे भी लिखी, कही और सुनायी जा सकती है। एक बात और बतायी मोनालिसा ने कि अब वह हर हफ्ते काफी हाउस की एक कहानी अपनी अलग अलग क्‍लासेस में सुनाया करेगी और उन्‍हें साहित्‍य से इस तरीके से जोड़ेगी। मेरे पास अपनी ओर से कहने के लिए कुछ नहीं बचता।

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  7. आप दोनों का भी जबाब नहीं ,बेहतरीन प्रस्तुति

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  8. umda blog hain kahnai sunne me bahut acchi lag rahi hain
    suraj prkash jee bahut acchi kahani maz aaa gay hain sun ke

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  9. शानदार प्रस्तुति ...सूरज प्रकाश जी आप को बधाई हो आगे भी ऐसी ही कहानियां हम जैसे पाठक को मिलता रहे
    god bless you

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  10. बेहतरीन प्रस्तुति!

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  11. यह कहानी नहीं है... शायद आने वाली एक हक़ीकत है.. ऐसा लगता है मानो किसी जीवन की पटकथा पहले से ही लिख दी गयी हो.

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