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रविवार, 13 अक्तूबर 2013

इस बार ममता कालिया की कहानी 'लैला मंजनू' (स्‍वर ममता सिंह)

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'कॉफी-हाउस' कथा-पाठ का ब्‍लॉग है।

हमारा प्रयास है कि हम पढ़ने से इतर सुनने के लिए कहानियां उपलब्‍ध करवाएं। और इस तरह उपलब्‍ध करवाएं कि उन्‍हें साझा किया जा सके। बांटा जा सके। पिछले कुछ महीनों से हमने देश-विदेश के कई प्रतिष्ठित कथाकारों की कहानियां साझा की हैं। इस बार हम लेकर आये हैं ममता कालिया की कहानी 'लैला मंजनू'। इस कहानी को सुनने के लिए आपको अपने व्‍यस्‍त जीवन में से साढ़े बारह मिनिट निकालने होंगे।

ममता कालिया का रचना-संसार इतना वृहद् है कि उसमें से किसी एक
कहानी को चुनना बेहद मुश्किल है। ज़ाहिर है कि 'कॉफी-हाउस' पर भविष्‍य में उनकी और भी कहानियां आपको सुनने मिलेंगी। ख़ासतौर पर 'दौड़' और 'कितने शहरों में कितनी बार' (दोनों ही धारावाहिक रूप में)। बहरहाल 'हज़ारों ख़्वाहिशों ऐसी कि हर ख्‍़वाहिश पर दम निकले'।
तस्‍वीर साभार-- गद्यकोश। 

Story: Laila majnu
Writer: Mamta Kalia
Voice: Mamta Singh
Duration: 12 30

एक और प्‍लेयर ताकि सनद रहे।

डाउनलोड कड़ी एक 
डाउनलोड कड़ी दो 

डाउनलोड कैसे करें....इसके लिए एक ट्यूटोरियल उपलब्‍ध है। यहां पढ़ें।
'कॉफी-हाउस' में अब तक प्रस्‍तुत कहानियां।


महादेवी वर्मा की रचना--'गिल्‍लू'
भीष्‍म साहनी की कहानी--'चीफ़ की दावत'
मन्‍नू भंडारी की कहानी-'सयानी बुआ'
एंतोन चेखव की कहानी- 'एक छोटा-सा मज़ाक़'
सियाराम शरण गुप्‍त की कहानी-- 'काकी'
हरिशंकर परसाई की रचना--'चिरऊ महाराज'
सुधा अरोड़ा की कहानी--'एक औरत तीन बटा चार'
सत्‍यजीत रे की कहानी--'सहपाठी'
जयशंकर प्रसाद की कहानी--'ममता'
दो बाल कहानियां--बड़े भैया के स्‍वर में
उषा प्रियंवदा की कहानी वापसी
अमरकांत की कहानी 'दोपहर का भोजन'
ओ. हेनरी की कहानी 'आखिरी पत्‍ता'
लू शुन की कहानी आखिरी बातचीत'
प्रत्‍यक्षा की कहानी 'बलमवा तुम क्‍या जानो प्रीत'
अज्ञेय की कहानी 'गैंगरीन'
महादेवी वर्मा का संस्‍मरण 'सोना हिरणा'
ओमा शर्मा की कहानी ‘ग्‍लोबलाइज़ेशन’ 

तो अब मुलाक़ात होगी अगले रविवार। एक नयी कहानी के साथ। आपने 'कॉफी-हाउस' के बारे में अपने मित्रों और आत्‍मीयों को बताया क्‍या। और क्‍या आपने कहानियां डाउनलोड और साझा कीं। इंतज़ार किस बात का है भई। अभी कीजिए। विजयादशमी की शुभकामनाएं। 
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'कॉफी-हाउस' कथा-पाठ का ब्‍लॉग है।

हमारा प्रयास है कि हम पढ़ने से इतर सुनने के लिए कहानियां उपलब्‍ध करवाएं। और इस तरह उपलब्‍ध करवाएं कि उन्‍हें साझा किया जा सके। बांटा जा सके। पिछले कुछ महीनों से हमने देश-विदेश के कई प्रतिष्ठित कथाकारों की कहानियां साझा की हैं। इस बार हम लेकर आये हैं ममता कालिया की कहानी 'लैला मंजनू'। इस कहानी को सुनने के लिए आपको अपने व्‍यस्‍त जीवन में से साढ़े बारह मिनिट निकालने होंगे।

ममता कालिया का रचना-संसार इतना वृहद् है कि उसमें से किसी एक
कहानी को चुनना बेहद मुश्किल है। ज़ाहिर है कि 'कॉफी-हाउस' पर भविष्‍य में उनकी और भी कहानियां आपको सुनने मिलेंगी। ख़ासतौर पर 'दौड़' और 'कितने शहरों में कितनी बार' (दोनों ही धारावाहिक रूप में)। बहरहाल 'हज़ारों ख़्वाहिशों ऐसी कि हर ख्‍़वाहिश पर दम निकले'।
तस्‍वीर साभार-- गद्यकोश। 

Story: Laila majnu
Writer: Mamta Kalia
Voice: Mamta Singh
Duration: 12 30

एक और प्‍लेयर ताकि सनद रहे।

डाउनलोड कड़ी एक 
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डाउनलोड कैसे करें....इसके लिए एक ट्यूटोरियल उपलब्‍ध है। यहां पढ़ें।
'कॉफी-हाउस' में अब तक प्रस्‍तुत कहानियां।


महादेवी वर्मा की रचना--'गिल्‍लू'
भीष्‍म साहनी की कहानी--'चीफ़ की दावत'
मन्‍नू भंडारी की कहानी-'सयानी बुआ'
एंतोन चेखव की कहानी- 'एक छोटा-सा मज़ाक़'
सियाराम शरण गुप्‍त की कहानी-- 'काकी'
हरिशंकर परसाई की रचना--'चिरऊ महाराज'
सुधा अरोड़ा की कहानी--'एक औरत तीन बटा चार'
सत्‍यजीत रे की कहानी--'सहपाठी'
जयशंकर प्रसाद की कहानी--'ममता'
दो बाल कहानियां--बड़े भैया के स्‍वर में
उषा प्रियंवदा की कहानी वापसी
अमरकांत की कहानी 'दोपहर का भोजन'
ओ. हेनरी की कहानी 'आखिरी पत्‍ता'
लू शुन की कहानी आखिरी बातचीत'
प्रत्‍यक्षा की कहानी 'बलमवा तुम क्‍या जानो प्रीत'
अज्ञेय की कहानी 'गैंगरीन'
महादेवी वर्मा का संस्‍मरण 'सोना हिरणा'
ओमा शर्मा की कहानी ‘ग्‍लोबलाइज़ेशन’ 

तो अब मुलाक़ात होगी अगले रविवार। एक नयी कहानी के साथ। आपने 'कॉफी-हाउस' के बारे में अपने मित्रों और आत्‍मीयों को बताया क्‍या। और क्‍या आपने कहानियां डाउनलोड और साझा कीं। इंतज़ार किस बात का है भई। अभी कीजिए। विजयादशमी की शुभकामनाएं। 

7 टिप्पणियाँ:

  1. bahut achchhi likhi kahani aur utne he umda tarah se padhi gayi . do mamataon ka saanjha kamaal! oma sharma

    उत्तर देंहटाएं
  2. रवीन्द्र कालिया जी को तो पढ़ा था पर ममता जी की कहानी पहली बार सुनी; बहुत पसंद आई । ममता सिंह जी की अदायगी भी बहुत बढ़िया लगी ।

    "अपने प्रथम कोटि के दिमाग के तृतीय कोटि के काम में लगा वो अपनी समस्त प्रतिभा मटर-पनीर में झोंक कर, सहनशक्ति का सलाद और रचनात्मकता का रायता परोस, स्वयं को धन्य-धन्य मानती ।" उम्दा कहानी, उम्दा अदायगी के साथ

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  3. बेहतरीन ...उम्दा प्रस्तुतीकरण के साथ...

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  4. जीवन के वास्तविक धरातल पर टिकी कहानी।

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  5. बेहतरीन ...उम्दा प्रस्तुतीकरण

    nice..............................
    deepak gupta maheshwar m.p.

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  6. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  7. Nice story and very nice presentation. Many a time we take people around us for granted. We should realize that they too are human beings and need some attention.
    Puru

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