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रविवार, 10 नवंबर 2013

अमृता प्रीतम की कहानी 'एक जीवी एक रत्‍नी एक सपना' (स्‍वर ममता सिंह)

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'कथा-पाठ' के ब्‍लॉग 'कॉफी-हाउस' में हम हर सप्‍ताह एक कहानी का वाचन करते हैं।

कहानियां पढ़ने की परंपरा की अब व्‍यापक रूप से जो हालत है--वो किसी से छिपी नहीं। मित्रों और 'कॉफी-हाउस' के 'मेहमानों' का कहना है कि इस बहाने वो नित-नयी कहानियां सुन पा रहे हैं। हमारा विश्‍वास है कि आप सभी अपने लिए तो सुन ही रहे होंगे। पर हमारी कामयाबी तब होगी जब आप 'कॉफी-हाउस' पर प्रस्‍तुत कहानियों को डाउनलोड करके साझा करें।

हम अकसर सोच में पड़ जाते हैं कि अपने आत्‍मीयों को उपहार में इस बार क्‍या दिया जाए। क्‍यों ना आप 'कॉफी-हाउस' की कुछ कहानियों को डाउनलोड करके एक सीडी पर प्रिंट कर लें। और उसे उपहार में दे दें। मुमकिन है कि ये उपहार सबसे अलग साबित हो। ये कहना ज़रूरी है कि यहां हमारा मक़सद अपना प्रचार करना नहीं, 'कथा-पाठ' की परंपरा को आगे बढ़ाना है।

इस बार 'कॉफी-हाउस' में अमृता प्रीतम की कहानी 'एक जीवी, एक
रत्‍नी, एक सपना'। इस कहानी को सुनने के लिए आपको अपने व्‍यस्‍त जीवन में से केवल दस मिनिट निकालने होंगे।

Story: Ek Jeevi, Ek Ratni, Ek Sapna
Writer: Amrita Preetam
Voice: Mamta Singh
Duration: 9 46

एक और प्‍लेयर ताकि सनद रहे 


ये रहीं डाउनलोड कडियां
डाउनलोड कड़ी एक 
और 
डाउनलोड कड़ी दो 

ये भी कह दें कि 'कॉफी-हाउस' की कहानियों को आप डाउनलोड करके अपने मित्रों-आत्‍मीयों के साथ बांट सकते हैं। साझा कर सकते हैं। कोई समस्‍या है तो ये ट्यूटोरियल पढ़ें

अब तक की कहानियों की सूची- 

महादेवी वर्मा की रचना--'गिल्‍लू'
भीष्‍म साहनी की कहानी--'चीफ़ की दावत'
मन्‍नू भंडारी की कहानी-'सयानी बुआ'
एंतोन चेखव की कहानी- 'एक छोटा-सा मज़ाक़'
सियाराम शरण गुप्‍त की कहानी-- 'काकी'
हरिशंकर परसाई की रचना--'चिरऊ महाराज'
सुधा अरोड़ा की कहानी--'एक औरत तीन बटा चार'
सत्‍यजीत रे की कहानी--'सहपाठी'
जयशंकर प्रसाद की कहानी--'ममता'
दो बाल कहानियां--बड़े भैया के स्‍वर में
उषा प्रियंवदा की कहानी वापसी
अमरकांत की कहानी 'दोपहर का भोजन'
ओ. हेनरी की कहानी 'आखिरी पत्‍ता'
लू शुन की कहानी आखिरी बातचीत'
प्रत्‍यक्षा की कहानी 'बलमवा तुम क्‍या जानो प्रीत'
अज्ञेय की कहानी 'गैंगरीन'
महादेवी वर्मा का संस्‍मरण 'सोना हिरणा'
ओमा शर्मा की कहानी ग्‍लोबलाइज़ेशन
ममता कालिया की कहानी 
लैला मजनूं
प्रेमचंद की कहानी 'बड़े भाई साहब'
सूरज प्रकाश की कहानी 'दो जीवन समांतर'
कुमार अंबुज की कहानी 'एक दिन मन्‍ना डे'

तो अब अगले रविवार मिलेंगे, किसी और रोचक कहानी के पाठ के साथ। आप डाउनलोड करके कहानियों को साझा कर रहे हैं ना। एक छोटा-सा काम और कीजिएगा। 'कॉफी-हाउस' के बारे में अपने साथियों को अवश्‍य बताईयेगा। 

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'कथा-पाठ' के ब्‍लॉग 'कॉफी-हाउस' में हम हर सप्‍ताह एक कहानी का वाचन करते हैं।

कहानियां पढ़ने की परंपरा की अब व्‍यापक रूप से जो हालत है--वो किसी से छिपी नहीं। मित्रों और 'कॉफी-हाउस' के 'मेहमानों' का कहना है कि इस बहाने वो नित-नयी कहानियां सुन पा रहे हैं। हमारा विश्‍वास है कि आप सभी अपने लिए तो सुन ही रहे होंगे। पर हमारी कामयाबी तब होगी जब आप 'कॉफी-हाउस' पर प्रस्‍तुत कहानियों को डाउनलोड करके साझा करें।

हम अकसर सोच में पड़ जाते हैं कि अपने आत्‍मीयों को उपहार में इस बार क्‍या दिया जाए। क्‍यों ना आप 'कॉफी-हाउस' की कुछ कहानियों को डाउनलोड करके एक सीडी पर प्रिंट कर लें। और उसे उपहार में दे दें। मुमकिन है कि ये उपहार सबसे अलग साबित हो। ये कहना ज़रूरी है कि यहां हमारा मक़सद अपना प्रचार करना नहीं, 'कथा-पाठ' की परंपरा को आगे बढ़ाना है।

इस बार 'कॉफी-हाउस' में अमृता प्रीतम की कहानी 'एक जीवी, एक
रत्‍नी, एक सपना'। इस कहानी को सुनने के लिए आपको अपने व्‍यस्‍त जीवन में से केवल दस मिनिट निकालने होंगे।

Story: Ek Jeevi, Ek Ratni, Ek Sapna
Writer: Amrita Preetam
Voice: Mamta Singh
Duration: 9 46

एक और प्‍लेयर ताकि सनद रहे 


ये रहीं डाउनलोड कडियां
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और 
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ये भी कह दें कि 'कॉफी-हाउस' की कहानियों को आप डाउनलोड करके अपने मित्रों-आत्‍मीयों के साथ बांट सकते हैं। साझा कर सकते हैं। कोई समस्‍या है तो ये ट्यूटोरियल पढ़ें

अब तक की कहानियों की सूची- 

महादेवी वर्मा की रचना--'गिल्‍लू'
भीष्‍म साहनी की कहानी--'चीफ़ की दावत'
मन्‍नू भंडारी की कहानी-'सयानी बुआ'
एंतोन चेखव की कहानी- 'एक छोटा-सा मज़ाक़'
सियाराम शरण गुप्‍त की कहानी-- 'काकी'
हरिशंकर परसाई की रचना--'चिरऊ महाराज'
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दो बाल कहानियां--बड़े भैया के स्‍वर में
उषा प्रियंवदा की कहानी वापसी
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लैला मजनूं
प्रेमचंद की कहानी 'बड़े भाई साहब'
सूरज प्रकाश की कहानी 'दो जीवन समांतर'
कुमार अंबुज की कहानी 'एक दिन मन्‍ना डे'

तो अब अगले रविवार मिलेंगे, किसी और रोचक कहानी के पाठ के साथ। आप डाउनलोड करके कहानियों को साझा कर रहे हैं ना। एक छोटा-सा काम और कीजिएगा। 'कॉफी-हाउस' के बारे में अपने साथियों को अवश्‍य बताईयेगा। 

4 टिप्पणियाँ:

  1. अर्चना पंत10 नवंबर 2013 को 10:35 am

    "हाय रे स्त्री डूबने के लिए भी तैयार है यदि तेरा प्रिय इक सागर हो ..."

    इतना दर्द सिर्फ अमृता की क़लम से ही उतर सकता था !
    बहुत ही मार्मिक कथा .... और उससे भी संवेदनशील और मार्मिक रेडियोसखी ममता सिंह का स्वर !
    उनकी आवाज़ में शब्द जीवंत हो जाते हैं ....
    यहाँ तक कि पालक के पत्तों की सारी कोमलता ... टमाटरों का सारा रंग ..... और हरी मिर्ची की सारी ख़ुशबू .... उनकी आवाज़ से छनती हुई, जाने कैसे ख़ुद-ब-ख़ुद, हम तक पहुँच जाती है ..... कहानी को एक नया ... अद्भुत आयाम मिलता है ...
    इस प्रयास के लिए एक बार फिर बहुत .. बहुत आभार ! :)

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. हम तो चमत्कृत है ।

      ख़ुद शब्द ही नहीं सूझ रहे थे कुछ कहने को.....

      ....सो आपकी आवाज़ में ही मिला ले रहे हैं अपनी भी आवाज़ !!

      हटाएं