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रविवार, 1 सितंबर 2013

ओ. हेनरी की कहानी 'आखिरी पत्‍ता' (स्‍वर ममता सिंह)

"
कथा-पाठ के ब्‍लॉग 'कॉफी-हाउस' के ज़रिये हम देश-विदेश की कहानियों को 'ऑडियो-रूप' में उपलब्‍ध करवा रहे हैं। हमने हमेशा कहा है कि ये कहानियां डाउनलोड करके अपने परिचितों और आत्‍मीयों के बीच बांटी जा सकती हैं। ख़ास मौक़ों पर उपहार में दी जा सकती हैं। इन्‍हें बच्‍चों को सुनवाया जा सकता है। और शायद कहानियों में उनकी दिलचस्‍पी पैदा की जा सकती है।

इस बार 'कॉफी-हाउस' में हम जिस कहानीकार की कहानी लेकर आए हैं--उसके चाहने वालों की तादाद हमेशा ख़ूब-ख़ूब रही है। देश-विदेश के फिल्‍मकारों ने उनकी कहानियों से प्रेरणा ली। तमाम भाषाओं में उनके अनुवाद हुए। ओ.हेनरी आज 'कॉफी-हाउस' में पहली बार आ रहे हैं। पर हमारा इरादा है कि उनकी बहुत सारी कहानियां यहां पढ़ी जायें। (तस्‍वीर साभार: इस साइट से)।

कहानियों के संदर्भ में ओ. हेनरी का ये कथन ग़ौर करने लायक़ है:

“I'll give you the whole secret to short story writing. Here it is. Rule 1: Write stories that please yourself. There is no Rule 2.”


इस बार पेश है ओ. हेनरी की कहानी--'आखिरी पत्‍ता'। इसे सुनने के लिए आपको अपनी व्‍यस्‍त जिंदगी में से तकरीबन बीस मिनिट निकालने होंगे।

Story: Aakhiri Patta
Translation of Origional Story: "The Last Leaf"
Writer: O. Henry
Voice: Mamta Singh
Duration: 20 03


एक और प्‍लेयर ताकि सनद रहे



हमेशा की तरह ये बताना चाहेंगे कि इस कहानी को डाउनलोड किया जा सकता है। कोई दिक्‍कत हो तो बेहिचक बतायें।
डाउनलोड कड़ी एक 
  डाउनलोड कड़ी दो।
हमेशा की तरह अब तक की कहानियों की सूची:
महादेवी वर्मा की रचना--'गिल्‍लू'
भीष्‍म साहनी की कहानी--'चीफ़ की दावत'
मन्‍नू भंडारी की कहानी-'सयानी बुआ'
एंतोन चेखव की कहानी- 'एक छोटा-सा मज़ाक़'
सियाराम शरण गुप्‍त की कहानी-- 'काकी'
हरिशंकर परसाई की रचना--'चिरऊ महाराज'
सुधा अरोड़ा की कहानी--'एक औरत तीन बटा चार'
सत्‍यजीत रे की कहानी--'सहपाठी'
जयशंकर प्रसाद की कहानी--'ममता'
दो बाल कहानियां--बड़े भैया के स्‍वर में
उषा प्रियंवदा की कहानी वापसी
अमरकांत की कहानी 'दोपहर का भोजन'


तो मिलते हैं अगले रविवार एक नयी कहानी के साथ।
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कथा-पाठ के ब्‍लॉग 'कॉफी-हाउस' के ज़रिये हम देश-विदेश की कहानियों को 'ऑडियो-रूप' में उपलब्‍ध करवा रहे हैं। हमने हमेशा कहा है कि ये कहानियां डाउनलोड करके अपने परिचितों और आत्‍मीयों के बीच बांटी जा सकती हैं। ख़ास मौक़ों पर उपहार में दी जा सकती हैं। इन्‍हें बच्‍चों को सुनवाया जा सकता है। और शायद कहानियों में उनकी दिलचस्‍पी पैदा की जा सकती है।

इस बार 'कॉफी-हाउस' में हम जिस कहानीकार की कहानी लेकर आए हैं--उसके चाहने वालों की तादाद हमेशा ख़ूब-ख़ूब रही है। देश-विदेश के फिल्‍मकारों ने उनकी कहानियों से प्रेरणा ली। तमाम भाषाओं में उनके अनुवाद हुए। ओ.हेनरी आज 'कॉफी-हाउस' में पहली बार आ रहे हैं। पर हमारा इरादा है कि उनकी बहुत सारी कहानियां यहां पढ़ी जायें। (तस्‍वीर साभार: इस साइट से)।

कहानियों के संदर्भ में ओ. हेनरी का ये कथन ग़ौर करने लायक़ है:

“I'll give you the whole secret to short story writing. Here it is. Rule 1: Write stories that please yourself. There is no Rule 2.”


इस बार पेश है ओ. हेनरी की कहानी--'आखिरी पत्‍ता'। इसे सुनने के लिए आपको अपनी व्‍यस्‍त जिंदगी में से तकरीबन बीस मिनिट निकालने होंगे।

Story: Aakhiri Patta
Translation of Origional Story: "The Last Leaf"
Writer: O. Henry
Voice: Mamta Singh
Duration: 20 03


एक और प्‍लेयर ताकि सनद रहे



हमेशा की तरह ये बताना चाहेंगे कि इस कहानी को डाउनलोड किया जा सकता है। कोई दिक्‍कत हो तो बेहिचक बतायें।
डाउनलोड कड़ी एक 
  डाउनलोड कड़ी दो।
हमेशा की तरह अब तक की कहानियों की सूची:
महादेवी वर्मा की रचना--'गिल्‍लू'
भीष्‍म साहनी की कहानी--'चीफ़ की दावत'
मन्‍नू भंडारी की कहानी-'सयानी बुआ'
एंतोन चेखव की कहानी- 'एक छोटा-सा मज़ाक़'
सियाराम शरण गुप्‍त की कहानी-- 'काकी'
हरिशंकर परसाई की रचना--'चिरऊ महाराज'
सुधा अरोड़ा की कहानी--'एक औरत तीन बटा चार'
सत्‍यजीत रे की कहानी--'सहपाठी'
जयशंकर प्रसाद की कहानी--'ममता'
दो बाल कहानियां--बड़े भैया के स्‍वर में
उषा प्रियंवदा की कहानी वापसी
अमरकांत की कहानी 'दोपहर का भोजन'


तो मिलते हैं अगले रविवार एक नयी कहानी के साथ।

10 टिप्पणियाँ:

  1. बेहतरीन रचना बेहतरीन स्वर में सुनना -एक बेहतरीन अनुभव ...शुक्रिया

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  2. आस रह गयी, साँस रह गयी
    अद्भुत कहानी

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  3. स्कूली दिनों से पढ़ते आ रहे अपने बेहद चहेते ओ० हेनरी की कहानियों के शीर्ष (क्लाइमेक्स) का तिलिस्म हमेशा से अचम्भित करने वाला रहा है !

    ...लेकिन आज सुबह उससे कहीं बहुत ज़्यादा ही अच्म्भित किया रेडियोसखी की तिलिस्मी आवाज़ की तरह-तरह के भाव-प्रवण और नाटकीय उतार-चढ़ाव की सम्मोहक क्षमता वाली प्रतिभा ने !

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  4. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  5. Mamtaji,

    I had read this story for the first time in 1959 when my late mother gave me a book of O'Henry's Stories. It was my favorite story. I listened to your rendition tonight with my 63 years old eyes closed. You took me back to my childhood. The characters in the story came alive on the screen of my mind. You brought tears to my eyes and a lump in my throat at the end. Thank you, thank you, thank you.

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  6. जाने कितनी बार बढ़ी है यह कहानी। हर बार वही अनुभव दोहराया जाता है। सुन कर फिर झुरझुरी सी हो गई।

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  7. रोमांच हो आया ! अब तक की सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति ! ममता को बधाई !

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  8. वाह !! मैंने पहली बार यह कहानी सुनी, अभी तक पढ़ी भी नहीं थी, वाकई बहुत अच्छी कृति ।

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  9. My eyes swelled up, the hair on my body stood up. Ah...the universality of human emotions and a sense of nostalgia for the good old world. O Henry and Mamta Singh should collaborate more often.

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