ठिठुरता हुआ गणतंत्र: हरिशंकर परसाई ( वाचन यूनुस खान)
'कॉफी हाउस' पर आप सभी को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं।आज हम प्रस्तुत कर रहे हैं हरिशंकर परसाई की रचना 'ठिुठरता हुआ गणतंत्र'। गणतंत्र दिवस के इस दिन हमने विशेष रूप से इस रचना का चयन किया है।परसाई जी अपने बेलाग और तीखे व्यंग्यों के लिए जाने जाते हैं। इस रचना को प्रस्तुत करते हुए वो दिन याद आ रहे हैं जब एन.एस.एस. (राष्ट्रीय सेवा योजना) के एक शिविर में मध्यप्रदेश के एक गांव में हम कुछ मित्र मंडली बनाकर परसाई जी की रचनाओं...