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रविवार, 23 जून 2013

मन्‍नू भंडारी की कहानी 'सयानी बुआ' स्‍वर- रेडियोसखी ममता सिंह

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'कॉफी-हाउस' की तीसरी पोस्‍ट के साथ हम हाजिर हैं।

इस बार मन्‍नू भंडारी की कहानी 'सयानी बुआ' पेश की जा रही है।
मन्‍नू जी के मुताबिक़ ये उनके बहुत शुरूआती दौर की कहानी है। हमें खुशी है कि मन्‍नू जी ने 'कॉफी-हाउस' के लिए अपनी एक ताज़ा कहानी भी हमें दी है। जिसे हम जल्‍दी ही लेकर आयेंगे।
मन्‍नू जी हमेशा से ही हमारी और आपकी प्रिय रचनाकार रही हैं। हमें विश्‍वास है कि उनकी कहानी को पढ़ने की बजाय सुनने का ये अनुभव आपके लिए दिलचस्‍प होगा।
इस कहानी को सुनने के लिए आपको अपनी दिनचर्या से ग्‍यारह मिनिट सत्‍ताईस सेकेन्‍ड निकालने होंगे। चित्र साभार- विकीमीडिया
आपको बता दें कि इस कहानी की डाउनलोड लिंक नीचे दी गयी है। उस पर क्लिक करते ही आप 'डिवशेयर' पर पहुंचेंगे--जहां तकरीबन पंद्रह सेकेन्‍ड के इंतज़ार के बाद कहानी की एम-पी3 फाइल आपके कंप्‍यूटर पर डाउनलोड हो सकेगी। इसे आप अपने मोबाइल, टैबलेट, लैप-टॉप या आई-पॉड जैसे उपकरणों पर संजो सकते हैं। और अपने मित्रों और आत्‍मीयों के साथ साझा कर सकते हैं।
पिछली प्रस्‍तुतियां 'गिल्‍लू' और 'चीफ़ की दावत' भी डाउनलोड के लिए उपलब्‍ध है। 'कॉफी-हाउस' के ज़रिये हम हर रविवार एक नयी कहानी का पाठ करेंगे। 'कॉफी-हाउस' पर हर दौर की कहानियों की प्रस्‍तुति होगी।


Story: Sayaani Bua
Writer: Mannu Bhandari
Voice- Mamta Singh Duration: 11 27


ये रही डाउनलोड कड़ी

ऊपर की लिंक पर क्लिक करेंगे तो आप डिव-शेयर की साइट पर पहुंचेंगे। जहां हरे रंग वाले डाउनलोड बॉक्‍स को क्लिक करने के
तकरीबन पंद्रह सेकेन्‍ड के इंतज़ार के बाद डाउनलोड शुरू हो जायेगा


अन्‍य कहानियों की डाउनलोड कडियां।
'गिल्‍लू' यहां से डाउनलोड कीजिए
'चीफ़ की दावत' यहां से डाउनलो कीजिए।
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'कॉफी-हाउस' की तीसरी पोस्‍ट के साथ हम हाजिर हैं।

इस बार मन्‍नू भंडारी की कहानी 'सयानी बुआ' पेश की जा रही है।
मन्‍नू जी के मुताबिक़ ये उनके बहुत शुरूआती दौर की कहानी है। हमें खुशी है कि मन्‍नू जी ने 'कॉफी-हाउस' के लिए अपनी एक ताज़ा कहानी भी हमें दी है। जिसे हम जल्‍दी ही लेकर आयेंगे।
मन्‍नू जी हमेशा से ही हमारी और आपकी प्रिय रचनाकार रही हैं। हमें विश्‍वास है कि उनकी कहानी को पढ़ने की बजाय सुनने का ये अनुभव आपके लिए दिलचस्‍प होगा।
इस कहानी को सुनने के लिए आपको अपनी दिनचर्या से ग्‍यारह मिनिट सत्‍ताईस सेकेन्‍ड निकालने होंगे। चित्र साभार- विकीमीडिया
आपको बता दें कि इस कहानी की डाउनलोड लिंक नीचे दी गयी है। उस पर क्लिक करते ही आप 'डिवशेयर' पर पहुंचेंगे--जहां तकरीबन पंद्रह सेकेन्‍ड के इंतज़ार के बाद कहानी की एम-पी3 फाइल आपके कंप्‍यूटर पर डाउनलोड हो सकेगी। इसे आप अपने मोबाइल, टैबलेट, लैप-टॉप या आई-पॉड जैसे उपकरणों पर संजो सकते हैं। और अपने मित्रों और आत्‍मीयों के साथ साझा कर सकते हैं।
पिछली प्रस्‍तुतियां 'गिल्‍लू' और 'चीफ़ की दावत' भी डाउनलोड के लिए उपलब्‍ध है। 'कॉफी-हाउस' के ज़रिये हम हर रविवार एक नयी कहानी का पाठ करेंगे। 'कॉफी-हाउस' पर हर दौर की कहानियों की प्रस्‍तुति होगी।


Story: Sayaani Bua
Writer: Mannu Bhandari
Voice- Mamta Singh Duration: 11 27


ये रही डाउनलोड कड़ी

ऊपर की लिंक पर क्लिक करेंगे तो आप डिव-शेयर की साइट पर पहुंचेंगे। जहां हरे रंग वाले डाउनलोड बॉक्‍स को क्लिक करने के
तकरीबन पंद्रह सेकेन्‍ड के इंतज़ार के बाद डाउनलोड शुरू हो जायेगा


अन्‍य कहानियों की डाउनलोड कडियां।
'गिल्‍लू' यहां से डाउनलोड कीजिए
'चीफ़ की दावत' यहां से डाउनलो कीजिए।

7 टिप्पणियाँ:

  1. बहुत-बहुत आभार इस कहानी के लिए

    उत्तर देंहटाएं
  2. बचपन के ख़ुशनुमा दिन याद आ गये जब अलस्सुबह ही दरवाज़े पर खड़े राह देखते थे अख़बार वाले की -

    पहले चंपक,नंदन,चन्दामामा,पराग,लोटपोट और इन्द्रजाल कॉमिक्स और फिर बाद के बरसों में धर्मयुग*** और हिन्दुस्तान*** का इन्तज़ार करते !
    (***जिनमें नियमित मुलाक़ात होती थी मन्नू भंडारी जी से भी )

    तब क्या पता था कि अब बुढ़ौती में भी वही सिलसिला फिर शुरू हो जायेगा -
    हर रविवार की सुबह बेहद बेसब्री से "रेडियोसखी" और उनके "जीवनसखा" जी की राह देखने का !!

    - "डाक साब"
    :-)

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  3. introducing and promoting literature vs television , good for brain, intelligence, the growing ups and grown ups alike

    उत्तर देंहटाएं
  4. जब आशायें जीवतों पर टिकी हों, स्थूल का मोल कहाँ रहता है। सुनना कहानी को और रोचक बना देता है।

    उत्तर देंहटाएं
  5. I am writing a book on the social history of the Indian Coffee House, and a friend drew my attention to this audio programme. the first story i heard was Kaki, and it took me back to the days when we all waited for the Sunday morning radio programme for children, in Bangla it was "chhotoder asor."
    A brilliant idea, and so far I heard only Mamta Singh. She has a nice voice and knows the arts of story telling. Congratulations!

    उत्तर देंहटाएं