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रविवार, 25 जनवरी 2015

रवींद्रनाथ टैगोर की कहानी 'काबुलीवाला' (आवाज़ यूनुस ख़ान की)

"
'कॉफी हाउस' कथा-वाचन का ब्‍लॉग है।
हम हर रविवार एक कहानी लेकर हाजिर होते हैं।
ये सिलसिला कमोबेश लगातार चलता रहा है। और आज हम आपके लिए लेकर आये हैं रवींद्रनाथ टैगोर की एक कालजयी कहानी 'काबुलीवाला'।

'काबुलीवाला' बहुत पढ़ी और सुनी गयी कहानी है। इस पर फिल्‍म भी बन चुकी है।
कई पीढियों ने इसे अपने पाठ्यक्रम में पढ़ा है।
उम्‍मीद है कि 'काबुलीवाला' का ये वाचन आपको बचपन की याद दिलायेगा।
और नयी पीढ़ी भी इसी बहाने इससे परिचित हो सकेगी।
यहां ये कहना ज़रूरी है कि 'कॉफी-हाउस' की कहानियों को आप कभी भी कहीं भी डाउनलोड करके साझा कर सकते हैं। सोशल नेटवर्किंग पर भी। और मोबाइल नेटवर्किंग पर भी।
इसके अलावा एक सुंदर विचार ये भी कि इन कहानियों को किसी सीडी पर एक साथ संग्रहीत करके अपने आत्‍मीयों को उपहार में दी जा सकती है।

'कॉफी हाउस' पर कहानियों का सिलसिला जारी रहेगा।

Story: Kabuliwala
Writer: Rabindranath Tagore
Voice: Yunus Khan
Duration:



एक और प्‍लेयर ताकि सनद रहे




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ये भी कह दें कि 'कॉफी-हाउस' की कहानियों को आप डाउनलोड करके अपने मित्रों-आत्‍मीयों के साथ बांट सकते हैं। साझा कर सकते हैं। कोई समस्‍या है तो ये ट्यूटोरियल पढ़ें

अब तक की कहानियों की सूची- 
महादेवी वर्मा की रचना--'गिल्‍लू'
भीष्‍म साहनी की कहानी--'चीफ़ की दावत'
मन्‍नू भंडारी की कहानी-'सयानी बुआ'
एंतोन चेखव की कहानी- 'एक छोटा-सा मज़ाक़'
सियाराम शरण गुप्‍त की कहानी-- 'काकी'
हरिशंकर परसाई की रचना--'चिरऊ महाराज'
सुधा अरोड़ा की कहानी--'एक औरत तीन बटा चार'
सत्‍यजीत रे की कहानी--'सहपाठी'
जयशंकर प्रसाद की कहानी--'ममता'
दो बाल कहानियां--बड़े भैया के स्‍वर में
उषा प्रियंवदा की कहानी वापसी
अमरकांत की कहानी 'दोपहर का भोजन'
ओ. हेनरी की कहानी 'आखिरी पत्‍ता'
लू शुन की कहानी आखिरी बातचीत'
प्रत्‍यक्षा की कहानी 'बलमवा तुम क्‍या जानो प्रीत'
अज्ञेय की कहानी 'गैंगरीन'
महादेवी वर्मा का संस्‍मरण 'सोना हिरणा'
ओमा शर्मा की कहानी ग्‍लोबलाइज़ेशन
ममता कालिया की कहानी 
लैला मजनूं
प्रेमचंद की कहानी 'बड़े भाई साहब'
सूरज प्रकाश की कहानी 'दो जीवन समांतर'
कुमार अंबुज की कहानी 'एक दिन मन्‍ना डे'
अमृता प्रीतम की कहानी- 'एक जीवी, एक रत्‍नी, एक सपना'
जादू की सुनाई पापा की कहानी 'बादल भाई'
उदय प्रकाश की कहानी-'नेलकटर'
सूर्यबाला की कहानी 'दादी और रिमोट'
एस. आर. हरनोट की कहानी 'मोबाइल'
स्‍वयं प्रकाश की कहानी 'नीलकांत का सफर'
जादू की कहानी 'बदमाश कौआ'
प्रेमचंद गांधी की कहानी--'31 दिसंबर की रात''
रवींद्र कालिया की कहानी- 'गोरैया'।
अरविंद की कहानी 'रेडियो'
लक्ष्‍मी शर्मा की कहानी 'बातें'
हरिशंकर परसाई का व्‍यंग्‍य 'ठिठुरता हुआ गणतंत्र'
चंदन पांडे की कहानी 'मोहर'
कैलाश वानखेड़े की कहानी 'सत्‍यापित'
विभा रानी की कहानी 'मोहन जोदाड़ो की नंगी मूरत'
अमरकांत की कहानी 'पलाश के फूल'
उपेंद्रनाथ अश्‍क की कहानी 'डाची'।
ज्ञानरंजन की कहानी 'अमरूद का पेड़'
कुर्रतुल-ऐन-हैदर की कहानी- 'फोटोग्राफर' 
शशिभूषण द्विवेदी की कहानी --'छुट्टी का दिन' 
मनीषा कुलश्रेष्‍ठ की कहानी 'मौसम के मकान सूने हैं'
प्रभात रंजन की कहानी -'पत्र लेखक, साहित्‍य और खिड़की'
गुलज़ार की कहानी 'तकसीम'
गैब्रिएल गार्सिया मार्केज़ की दो कहानियां 'गांव में कुछ बहुत बुरा होने वाला है' और 'ऐसे ही किसी दिन' 
गीताश्री की कहानी ''लबरी' 
हृदयेश की कहानी 'तोते' 
मधु अरोड़ा की कहानी 'मुक्ति'
तरूण भटनागर की कहानी 'ढिबरियों की क़ब्रगाह'
जगदंबा प्रसाद दीक्षित की कहानी 'मुहब्‍बत'
मंटो की कहानी 'टोबा टेकसिंह'
स्‍वाति तिवारी की कहानी 'बूंद गुलाब जल की'
मन्‍नू भंडारी की कहानी 'मुक्ति'
हरि भटनागर की कहानी 'ग्रामोफ़ोन' 
हुस्‍न तबस्‍सुम निहां की कहानी 'नीले पंखों वाली लड़कियां'
दुष्‍यंत की कहानी 'यार तुम भी बस' 
ग़ज़ाल ज़ैगम की कहानी 'नमस्‍ते बुआ' 
कविता राकेश की कहानी 'ज़ायका'।
संजय बोरूंडे की कहानी 'कुंआं' 
प्रेम भारद्वाज की कहानी 'प्‍लीज़ किल मी मम्‍मी' 
जयश्री राय की कहानी 'छुट्टी का दिन' 
रघुनंदन त्रिवेदी की कहानी 'सिफैलोटस'
शानी की कहानी 'जली हुई रस्‍सी'
नन्‍हे जादू की आवाज़ में कहानी 'लापरवाह पिंटू'
सत्‍यनारायण पटेल की कहानी 'पर पाज़ेब ना भीगे' 
हरिशंकर परसाई का संस्‍मरण 'मुक्तिबोध' 
गोविंद मिश्र की कहानी 'माइकल लोबो' 
श्रीकांत दुबे की कहानी 'दहन' 
वंदना शुक्‍ल की कहानी 'ईद मुबारक' 
राकेश बिहारी की कहानी 'किनारे से दूर' 
रमेश उपाध्‍याय की कहानी 'रूदाला'
पद्मा सचदेव की कहानी 'कल कहां जाओगी' 
किशोर चौधरी की कहानी 'चौराहे पर सीढियां'
ममता सिंह की कहानी 'धुंध'
आलोक श्रीवास्‍तव की कहानी 'आफ़रीन'  
काशीनाथ सिंह की कहानी 'तीन काल कथा' 
हरिशंकर परसाई का व्‍यंग्‍य-'एक मध्‍यमवर्गीय कुत्‍ता'
दीपक शर्मा की कहानी 'चमड़े का अहाता'
विमलेश त्रिपाठी की कहानी 'पिता' 
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हरिशंकर परसाई का संस्‍मरण 'मुक्तिबोध' 
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विमलेश त्रिपाठी की कहानी 'पिता' 

3 टिप्पणियाँ:

  1. रवीन्द्रनाथ टेगौर की कहानी बचपन से सुनी है। १-२ वर्षों में एक बार तो
    कहानी वापस पढ़ लेता हूं। तो नयी सी लगती है। पर आज आपकी आवाज में
    कहानी सुनते हुए कहानी पढ़ना एक नया ही अनुभव है. धन्यवाद

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  2. आज बचपन से पढ़ी काबुलीवाला की यह कहानी आपके स्वर से जीवंत हो गयी ! और काबुल भ्रमण की यादें भी ताज़ा हो गयीं। आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  3. नमस्ते युनुस जी, सबसे पहले मै आपको ये बता दूँ की मै आपका फैन हूं बचपन से हीं. और आज आप तक मै सायद आप तक पहुच पा रहा हूँ,
    जब मै शायद 5वीं से छोटे क्लास में पढता था , तब ये कहानी पढ़ी थी,
    उस समय मेरे लिए ये सिर्फ कहानी था, और उसका शीर्षक अभी तक याद है.
    और आज आपके द्वारा इसको सुन कर मुझे मेरे "गुरु जी" की याद आ गयी जिन्होंने मुझे मेरे गावं के सरकारी प्राथमिक विद्यालय में ये पाठ पढाया था. आपको फिर से धन्यवाद

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