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रविवार, 25 जनवरी 2015

रवींद्रनाथ टैगोर की कहानी 'काबुलीवाला' (आवाज़ यूनुस ख़ान की)

'कॉफी हाउस' कथा-वाचन का ब्‍लॉग है। हम हर रविवार एक कहानी लेकर हाजिर होते हैं। ये सिलसिला कमोबेश लगातार चलता रहा है। और आज हम आपके लिए लेकर आये हैं रवींद्रनाथ टैगोर की एक कालजयी कहानी 'काबुलीवाला'। 'काबुलीवाला' बहुत पढ़ी और सुनी गयी कहानी है। इस पर फिल्‍म भी बन चुकी है। कई पीढियों ने इसे अपने पाठ्यक्रम में पढ़ा है। उम्‍मीद है कि 'काबुलीवाला' का ये वाचन आपको बचपन की याद दिलायेगा। और नयी पीढ़ी भी इसी बहाने इससे परिचित हो सकेगी। यहां...

रविवार, 18 जनवरी 2015

विमलेश त्रिपाठी की कहानी 'पिता' (आवाज़ यूनुस ख़ान की)

'कॉफ़ी-हाउस' में साल 2015 की ये पहली पोस्‍ट है। अनेक कारणों से पहली बार ब्‍लॉग पर तीन सप्‍ताह का अंतराल आया। इसकी बड़ी वजह थी कनेक्टिविटी। बहरहाल... हमारा प्रयास है कि 'कॉफी-हाउस' पर ऑडियो लगातार आते रहें। बिना किसी अंतराल के। आज हम लेकर आये हैं युवा कवि और कथाकार विमलेश त्रिपाठी की कहानी 'पिता'। विमलेश के कविता संग्रह हैं--'हम बचे रहेंगे' और 'एक देश और मरे हुए लोग'। 'अधूरे अंत की शुरूआत' कथा-संग्रह है। और 'कैनवस पर प्रेम'...