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रविवार, 30 मार्च 2014

'मौसमों के मकान सूने हैं'.......मनीषा कुलश्रेष्‍ठ की कहानी (आवाज़ ममता सिंह की)

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युवा रचनाकार मनीषा कुलश्रेष्‍ठ का नया उपन्‍यास 'पंचकन्‍या' पर्याप्‍त चर्चित है। इससे पहले उनके शिगाफ़' और 'शालभंजिका' जैसे उपन्‍यास और 'कठपुतलियाँ', 'कुछ भी तो रूमानी नहीं', 'बौनी होती परछाई' और 'केयर ऑफ स्वात घाटी' जैसे कहानी-संग्रह आ चुके हैं।

आज 'कॉफी हाउस' में हम आपके लिए लेकर आये हैं उनकी कहानी 'मौसमों के मकान सूने हैं'। इस कहानी को सुनने के लिए आपको अपनी व्‍यस्‍त जिंदगी में से केवल चौदह मिनिट निकालने होंगे। आपको ये भी बता दें कि इस कहानी को आप डाउनलोड करके आपस में साझा भी कर सकते हैं।



Story: Mausamon Ke Makaan Soone Hain
Writer: Manisha Kulshreshtha
Voice: Mamta Singh
Duration: 13 38




एक और प्‍लेयर ताकि सनद रहे।



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आपके सुझावों का स्‍वागत
ये भी कह दें कि 'कॉफी-हाउस' की कहानियों को आप डाउनलोड करके अपने मित्रों-आत्‍मीयों के साथ बांट सकते हैं। साझा कर सकते हैं। कोई समस्‍या है तो ये ट्यूटोरियल पढ़ें

अब तक की कहानियों की सूची- 
महादेवी वर्मा की रचना--'गिल्‍लू'
भीष्‍म साहनी की कहानी--'चीफ़ की दावत'
मन्‍नू भंडारी की कहानी-'सयानी बुआ'
एंतोन चेखव की कहानी- 'एक छोटा-सा मज़ाक़'
सियाराम शरण गुप्‍त की कहानी-- 'काकी'
हरिशंकर परसाई की रचना--'चिरऊ महाराज'
सुधा अरोड़ा की कहानी--'एक औरत तीन बटा चार'
सत्‍यजीत रे की कहानी--'सहपाठी'
जयशंकर प्रसाद की कहानी--'ममता'
दो बाल कहानियां--बड़े भैया के स्‍वर में
उषा प्रियंवदा की कहानी वापसी
अमरकांत की कहानी 'दोपहर का भोजन'
ओ. हेनरी की कहानी 'आखिरी पत्‍ता'
लू शुन की कहानी आखिरी बातचीत'
प्रत्‍यक्षा की कहानी 'बलमवा तुम क्‍या जानो प्रीत'
अज्ञेय की कहानी 'गैंगरीन'
महादेवी वर्मा का संस्‍मरण 'सोना हिरणा'
ओमा शर्मा की कहानी ग्‍लोबलाइज़ेशन
ममता कालिया की कहानी 
लैला मजनूं
प्रेमचंद की कहानी 'बड़े भाई साहब'
सूरज प्रकाश की कहानी 'दो जीवन समांतर'
कुमार अंबुज की कहानी 'एक दिन मन्‍ना डे'
अमृता प्रीतम की कहानी- 'एक जीवी, एक रत्‍नी, एक सपना'
जादू की सुनाई पापा की कहानी 'बादल भाई'
उदय प्रकाश की कहानी-'नेलकटर'
सूर्यबाला की कहानी 'दादी और रिमोट'
एस. आर. हरनोट की कहानी 'मोबाइल'
स्‍वयं प्रकाश की कहानी 'नीलकांत का सफर'
जादू की कहानी 'बदमाश कौआ'
प्रेमचंद गांधी की कहानी--'31 दिसंबर की रात''
रवींद्र कालिया की कहानी- 'गोरैया'।
अरविंद की कहानी 'रेडियो'
लक्ष्‍मी शर्मा की कहानी 'बातें'
हरिशंकर परसाई का व्‍यंग्‍य 'ठिठुरता हुआ गणतंत्र'
चंदन पांडे की कहानी 'मोहर'
कैलाश वानखेड़े की कहानी 'सत्‍यापित'
विभा रानी की कहानी 'मोहन जोदाड़ो की नंगी मूरत'
अमरकांत की कहानी 'पलाश के फूल'
उपेंद्रनाथ अश्‍क की कहानी 'डाची'।
ज्ञानरंजन की कहानी 'अमरूद का पेड़'
कुर्रतुल-ऐन-हैदर की कहानी- 'फोटोग्राफर' 
शशिभूषण द्विवेदी की कहानी --'छुट्टी का दिन' 
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युवा रचनाकार मनीषा कुलश्रेष्‍ठ का नया उपन्‍यास 'पंचकन्‍या' पर्याप्‍त चर्चित है। इससे पहले उनके शिगाफ़' और 'शालभंजिका' जैसे उपन्‍यास और 'कठपुतलियाँ', 'कुछ भी तो रूमानी नहीं', 'बौनी होती परछाई' और 'केयर ऑफ स्वात घाटी' जैसे कहानी-संग्रह आ चुके हैं।

आज 'कॉफी हाउस' में हम आपके लिए लेकर आये हैं उनकी कहानी 'मौसमों के मकान सूने हैं'। इस कहानी को सुनने के लिए आपको अपनी व्‍यस्‍त जिंदगी में से केवल चौदह मिनिट निकालने होंगे। आपको ये भी बता दें कि इस कहानी को आप डाउनलोड करके आपस में साझा भी कर सकते हैं।



Story: Mausamon Ke Makaan Soone Hain
Writer: Manisha Kulshreshtha
Voice: Mamta Singh
Duration: 13 38




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मन्‍नू भंडारी की कहानी-'सयानी बुआ'
एंतोन चेखव की कहानी- 'एक छोटा-सा मज़ाक़'
सियाराम शरण गुप्‍त की कहानी-- 'काकी'
हरिशंकर परसाई की रचना--'चिरऊ महाराज'
सुधा अरोड़ा की कहानी--'एक औरत तीन बटा चार'
सत्‍यजीत रे की कहानी--'सहपाठी'
जयशंकर प्रसाद की कहानी--'ममता'
दो बाल कहानियां--बड़े भैया के स्‍वर में
उषा प्रियंवदा की कहानी वापसी
अमरकांत की कहानी 'दोपहर का भोजन'
ओ. हेनरी की कहानी 'आखिरी पत्‍ता'
लू शुन की कहानी आखिरी बातचीत'
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अज्ञेय की कहानी 'गैंगरीन'
महादेवी वर्मा का संस्‍मरण 'सोना हिरणा'
ओमा शर्मा की कहानी ग्‍लोबलाइज़ेशन
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लैला मजनूं
प्रेमचंद की कहानी 'बड़े भाई साहब'
सूरज प्रकाश की कहानी 'दो जीवन समांतर'
कुमार अंबुज की कहानी 'एक दिन मन्‍ना डे'
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जादू की सुनाई पापा की कहानी 'बादल भाई'
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कुर्रतुल-ऐन-हैदर की कहानी- 'फोटोग्राफर' 
शशिभूषण द्विवेदी की कहानी --'छुट्टी का दिन' 

3 टिप्पणियाँ:

  1. Waah Mamata jee kya bhavpurna dhang se kahani sunayee. Aur Manisha Kulshreshtha jee, aapne bhee kya drishya ukere is kahani mein. Aap dono ko badhai.

    उत्तर देंहटाएं
  2. हताश दर्द में डूबी और अकेली जिंदगियों को ये भौतिकता वादी पूँजी वादी निर्मम निष्ठुर बाज़ार कैसे भुनाता है ये कहानी इसी और इंगित करती है | कहानी कर को बधाई | ममताजी ने कहानी की आत्मा को अपने स्वर से एकाकार कर अद्भुत जुगल बंदी प्रस्तुत कर दी है | बधाई >

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  3. अब भला हम क्या टिप्पणी करें ?

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