'मौसमों के मकान सूने हैं'.......मनीषा कुलश्रेष्ठ की कहानी (आवाज़ ममता सिंह की)

युवा रचनाकार मनीषा कुलश्रेष्ठ का नया उपन्यास 'पंचकन्या' पर्याप्त चर्चित है। इससे पहले उनके शिगाफ़' और 'शालभंजिका' जैसे उपन्यास और 'कठपुतलियाँ', 'कुछ भी तो रूमानी नहीं', 'बौनी होती परछाई' और 'केयर ऑफ स्वात घाटी' जैसे कहानी-संग्रह आ चुके हैं।...