Sosial media

लैला मंजनू लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
लैला मंजनू लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 2 नवंबर 2014

जन्‍मदिन पर विशेष--ममता कालिया की कहानी 'लैला मंजनू' आवाज़ ममता सिंह की

'कॉफी-हाउस' कथा-पाठ का ब्‍लॉग है।

हमारा प्रयास है कि हम पढ़ने से इतर सुनने के लिए कहानियां उपलब्‍ध करवाएं। और इस तरह उपलब्‍ध करवाएं कि उन्‍हें साझा किया जा सके। बांटा जा सके।

आज जानी-मानी रचनाकार ममता कालिया का जन्‍मदिन है। 'कॉफ़ी-हाउस' पर उनके जन्‍मदिन पर हम प्रस्‍तुत कर रहे हैं उनकी कहानी 'लैला मंजनू'। आपको बता दें कि ये एक री-पोस्‍ट है। ये कहानी हम पहले भी प्रस्‍तुत कर चुके हैंं। आपको ये भी बता दें कि इस कहानी को सुनने के लिए आपको अपने व्‍यस्‍त जीवन में से साढ़े बारह मिनिट निकालने होंगे।

ममता कालिया का रचना-संसार इतना वृहद् है कि उसमें से किसी एक
कहानी को चुनना बेहद मुश्किल है। ज़ाहिर है कि 'कॉफी-हाउस' पर भविष्‍य में उनकी और भी कहानियां आपको सुनने मिलेंगी। ख़ासतौर पर 'दौड़' और 'कितने शहरों में कितनी बार' (दोनों ही धारावाहिक रूप में)। बहरहाल 'हज़ारों ख़्वाहिशों ऐसी कि हर ख्‍़वाहिश पर दम निकले'।
तस्‍वीर साभार-- गद्यकोश।
एक बार फिर ममता जी को जन्‍मदिन की बधाईयां। 


Story: Laila majnu
Writer: Mamta Kalia
Voice: Mamta Singh
Duration: 12 30




एक और प्‍लेयर ताकि सनद रहे।

डाउनलोड कड़ी एक 
डाउनलोड कड़ी दो 

तो अब मुलाक़ात होगी अगले रविवार। एक नयी कहानी के साथ। आपने 'कॉफी-हाउस' के बारे में अपने मित्रों और आत्‍मीयों को बताया क्‍या। और क्‍या आपने कहानियां डाउनलोड और साझा कीं। इंतज़ार किस बात का है भई। अभी कीजिए।


ये भी कह दें कि 'कॉफी-हाउस' की कहानियों को आप डाउनलोड करके अपने मित्रों-आत्‍मीयों के साथ बांट सकते हैं। साझा कर सकते हैं। कोई समस्‍या है तो ये ट्यूटोरियल पढ़ें।

अब तक की कहानियों की सूची- 
महादेवी वर्मा की रचना--'गिल्‍लू'
भीष्‍म साहनी की कहानी--'चीफ़ की दावत'
मन्‍नू भंडारी की कहानी-'सयानी बुआ'
एंतोन चेखव की कहानी- 'एक छोटा-सा मज़ाक़'
सियाराम शरण गुप्‍त की कहानी-- 'काकी'
हरिशंकर परसाई की रचना--'चिरऊ महाराज'
सुधा अरोड़ा की कहानी--'एक औरत तीन बटा चार'
सत्‍यजीत रे की कहानी--'सहपाठी'
जयशंकर प्रसाद की कहानी--'ममता'
दो बाल कहानियां--बड़े भैया के स्‍वर में
उषा प्रियंवदा की कहानी ‘वापसी’
अमरकांत की कहानी 'दोपहर का भोजन'
ओ. हेनरी की कहानी 'आखिरी पत्‍ता'
लू शुन की कहानी ‘आखिरी बातचीत'
प्रत्‍यक्षा की कहानी 'बलमवा तुम क्‍या जानो प्रीत'
अज्ञेय की कहानी 'गैंगरीन'
महादेवी वर्मा का संस्‍मरण 'सोना हिरणा'
ओमा शर्मा की कहानी ‘ग्‍लोबलाइज़ेशन’
ममता कालिया की कहानी 
‘लैला मजनूं’
प्रेमचंद की कहानी 'बड़े भाई साहब'
सूरज प्रकाश की कहानी 'दो जीवन समांतर'
कुमार अंबुज की कहानी 'एक दिन मन्‍ना डे'
अमृता प्रीतम की कहानी- 'एक जीवी, एक रत्‍नी, एक सपना'
जादू की सुनाई पापा की कहानी 'बादल भाई'
उदय प्रकाश की कहानी-'नेलकटर'
सूर्यबाला की कहानी 'दादी और रिमोट'
एस. आर. हरनोट की कहानी 'मोबाइल'
स्‍वयं प्रकाश की कहानी 'नीलकांत का सफर'
जादू की कहानी 'बदमाश कौआ'
प्रेमचंद गांधी की कहानी--'31 दिसंबर की रात''
रवींद्र कालिया की कहानी- 'गोरैया'।
अरविंद की कहानी 'रेडियो'
लक्ष्‍मी शर्मा की कहानी 'बातें'
हरिशंकर परसाई का व्‍यंग्‍य 'ठिठुरता हुआ गणतंत्र'
चंदन पांडे की कहानी 'मोहर'
कैलाश वानखेड़े की कहानी 'सत्‍यापित'
विभा रानी की कहानी 'मोहन जोदाड़ो की नंगी मूरत'
अमरकांत की कहानी 'पलाश के फूल'
उपेंद्रनाथ अश्‍क की कहानी 'डाची'।
ज्ञानरंजन की कहानी 'अमरूद का पेड़'
कुर्रतुल-ऐन-हैदर की कहानी- 'फोटोग्राफर' 
शशिभूषण द्विवेदी की कहानी --'छुट्टी का दिन' 
मनीषा कुलश्रेष्‍ठ की कहानी 'मौसम के मकान सूने हैं'
प्रभात रंजन की कहानी -'पत्र लेखक, साहित्‍य और खिड़की'
गुलज़ार की कहानी 'तकसीम'
गैब्रिएल गार्सिया मार्केज़ की दो कहानियां 'गांव में कुछ बहुत बुरा होने वाला है' और 'ऐसे ही किसी दिन' 
गीताश्री की कहानी ''लबरी' 
हृदयेश की कहानी 'तोते' 
मधु अरोड़ा की कहानी 'मुक्ति'
तरूण भटनागर की कहानी 'ढिबरियों की क़ब्रगाह'
जगदंबा प्रसाद दीक्षित की कहानी 'मुहब्‍बत'
मंटो की कहानी 'टोबा टेकसिंह'
स्‍वाति तिवारी की कहानी 'बूंद गुलाब जल की'
मन्‍नू भंडारी की कहानी 'मुक्ति'
हरि भटनागर की कहानी 'ग्रामोफ़ोन' 
हुस्‍न तबस्‍सुम निहां की कहानी 'नीले पंखों वाली लड़कियां'
दुष्‍यंत की कहानी 'यार तुम भी बस' 
ग़ज़ाल ज़ैगम की कहानी 'नमस्‍ते बुआ' 
कविता राकेश की कहानी 'ज़ायका'।
संजय बोरूंडे की कहानी 'कुंआं' 
प्रेम भारद्वाज की कहानी 'प्‍लीज़ किल मी मम्‍मी' 
जयश्री राय की कहानी 'छुट्टी का दिन' 
रघुनंदन त्रिवेदी की कहानी 'सिफैलोटस'
शानी की कहानी 'जली हुई रस्‍सी'
नन्‍हे जादू की आवाज़ में कहानी 'लापरवाह पिंटू'
सत्‍यनारायण पटेल की कहानी 'पर पाज़ेब ना भीगे' 
हरिशंकर परसाई का संस्‍मरण 'मुक्तिबोध' 
गोविंद मिश्र की कहानी 'माइकल लोबो' 
श्रीकांत दुबे की कहानी 'दहन' 
वंदना शुक्‍ल की कहानी 'ईद मुबारक' 
राकेश बिहारी की कहानी 'किनारे से दूर' 
रमेश उपाध्‍याय की कहानी 'रूदाला'
पद्मा सचदेव की कहानी 'कल कहां जाओगी' 

रविवार, 13 अक्टूबर 2013

इस बार ममता कालिया की कहानी 'लैला मंजनू' (स्‍वर ममता सिंह)

'कॉफी-हाउस' कथा-पाठ का ब्‍लॉग है।

हमारा प्रयास है कि हम पढ़ने से इतर सुनने के लिए कहानियां उपलब्‍ध करवाएं। और इस तरह उपलब्‍ध करवाएं कि उन्‍हें साझा किया जा सके। बांटा जा सके। पिछले कुछ महीनों से हमने देश-विदेश के कई प्रतिष्ठित कथाकारों की कहानियां साझा की हैं। इस बार हम लेकर आये हैं ममता कालिया की कहानी 'लैला मंजनू'। इस कहानी को सुनने के लिए आपको अपने व्‍यस्‍त जीवन में से साढ़े बारह मिनिट निकालने होंगे।

ममता कालिया का रचना-संसार इतना वृहद् है कि उसमें से किसी एक
कहानी को चुनना बेहद मुश्किल है। ज़ाहिर है कि 'कॉफी-हाउस' पर भविष्‍य में उनकी और भी कहानियां आपको सुनने मिलेंगी। ख़ासतौर पर 'दौड़' और 'कितने शहरों में कितनी बार' (दोनों ही धारावाहिक रूप में)। बहरहाल 'हज़ारों ख़्वाहिशों ऐसी कि हर ख्‍़वाहिश पर दम निकले'।
तस्‍वीर साभार-- गद्यकोश। 

Story: Laila majnu
Writer: Mamta Kalia
Voice: Mamta Singh
Duration: 12 30

एक और प्‍लेयर ताकि सनद रहे।

डाउनलोड कड़ी एक 
डाउनलोड कड़ी दो 

डाउनलोड कैसे करें....इसके लिए एक ट्यूटोरियल उपलब्‍ध है। यहां पढ़ें।
'कॉफी-हाउस' में अब तक प्रस्‍तुत कहानियां।


महादेवी वर्मा की रचना--'गिल्‍लू'
भीष्‍म साहनी की कहानी--'चीफ़ की दावत'
मन्‍नू भंडारी की कहानी-'सयानी बुआ'
एंतोन चेखव की कहानी- 'एक छोटा-सा मज़ाक़'
सियाराम शरण गुप्‍त की कहानी-- 'काकी'
हरिशंकर परसाई की रचना--'चिरऊ महाराज'
सुधा अरोड़ा की कहानी--'एक औरत तीन बटा चार'
सत्‍यजीत रे की कहानी--'सहपाठी'
जयशंकर प्रसाद की कहानी--'ममता'
दो बाल कहानियां--बड़े भैया के स्‍वर में
उषा प्रियंवदा की कहानी ‘वापसी’
अमरकांत की कहानी 'दोपहर का भोजन'
ओ. हेनरी की कहानी 'आखिरी पत्‍ता'
लू शुन की कहानी ‘आखिरी बातचीत'
प्रत्‍यक्षा की कहानी 'बलमवा तुम क्‍या जानो प्रीत'
अज्ञेय की कहानी 'गैंगरीन'
महादेवी वर्मा का संस्‍मरण 'सोना हिरणा'
ओमा शर्मा की कहानी ‘ग्‍लोबलाइज़ेशन’ 

तो अब मुलाक़ात होगी अगले रविवार। एक नयी कहानी के साथ। आपने 'कॉफी-हाउस' के बारे में अपने मित्रों और आत्‍मीयों को बताया क्‍या। और क्‍या आपने कहानियां डाउनलोड और साझा कीं। इंतज़ार किस बात का है भई। अभी कीजिए। विजयादशमी की शुभकामनाएं।